हमारे जीवन का उल्लास हमारे जीवन का धन रोष।-नाटकों में से लिया गया काव्य संग्रह- रचनाएँ -जयशंकर प्रसाद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaishankar Prasad

हमारे जीवन का उल्लास हमारे जीवन का धन रोष।-नाटकों में से लिया गया काव्य संग्रह- रचनाएँ -जयशंकर प्रसाद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaishankar Prasad

हमारी करुणा के दो बूँद मिले एकत्र, हुआ संतोष।।
दृष्टि को कुछ भी रुकने दो, न यों चमक दो अपनी कान्ति।
देखने दो क्षण भर भी तो, मिले सौन्दर्य देखकर शान्ति।।
नहीं तो निष्ठुरता का अन्त, चला दो चपल नयन के बाण।
हृदय छिद जाए विकल बेहाल, वेदना से हो उसका त्राण।।

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