हमदम सूरज-तूस की आग-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

हमदम सूरज-तूस की आग-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

हम दो थे
मगर फिर
नीबू की तरह
पीला सूरज
डूब गया

रह गया
एक मैं
देर तक नही
इस अंधेरे से
उस अंधेरे तक
इस ख़्याल में
कि पौ फटेगी
सूरज आयेगा

और फिर
हो जायेंगे हम
कम-से-क्म
दो!

 

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