हउमै रोगु मानुख कउ दीना-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

हउमै रोगु मानुख कउ दीना-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

हउमै रोगु मानुख कउ दीना ॥
काम रोगि मैगलु बसि लीना ॥
द्रिसटि रोगि पचि मुए पतंगा ॥
नाद रोगि खपि गए कुरंगा ॥१॥
जो जो दीसै सो सो रोगी ॥
रोग रहित मेरा सतिगुरु जोगी ॥१॥ रहाउ ॥
जिहवा रोगि मीनु ग्रसिआनो ॥
बासन रोगि भवरु बिनसानो ॥
हेत रोग का सगल संसारा ॥
त्रिबिधि रोग महि बधे बिकारा ॥२॥
रोगे मरता रोगे जनमै ॥
रोगे फिरि फिरि जोनी भरमै ॥
रोग बंध रहनु रती न पावै ॥
बिनु सतिगुर रोगु कतहि न जावै ॥३॥
पारब्रहमि जिसु कीनी दइआ ॥
बाह पकड़ि रोगहु कढि लइआ ॥
तूटे बंधन साधसंगु पाइआ ॥
कहु नानक गुरि रोगु मिटाइआ ॥4॥7॥20॥1140॥

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