सफ़र का सामाँ तो है !-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

सफ़र का सामाँ तो है !-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

सरक रहा आहिस्ता-आहिस्ता आसमाँ तो है
निकल रहा दम के साथ-साथ अरमाँ तो है!

जल रहा है रोज़ आँखों के आगे धुआं-धुआं
हसरतों से बनाया था जो वही मकाँ तो है !

टूटे कई रिश्ते-नाते…बिछड़ गए कुछ अपने
अश्क न सही आँखों में, दिल परेशाँ तो है !

दिखते हैं जो ख़ाली-हाथ, नज़र का धोखा है
चंद शेर, कुछ नज़्में, सफ़र का सामाँ तो है !

सुधरने से पहले इनका बिगड़ना है लाज़िम
बदलेंगे हालात सबके ऐसा कोई इम्काँ तो है !

बिल्कुल ना होने से कुछ होना कहीं बेहतर
डगमगाया हुआ ही सही, अभी ईमाँ तो है !

उस रब पर भरोसा है… मोजज़ों पे यक़ीन
हुआ ना बेशक आज तलक एक गुमाँ तो है !

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