स्वयं बुद्ध हो जाना-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

स्वयं बुद्ध हो जाना-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

किसी मध्य रात्रि में
अपनी सुप्त रस्वादों को
मासूम मोह के धागों को
छोड़ निर्बद्ध हो जाना

विकल्प सारे तज देना
एक संकल्प भज लेना
पंचशील को अपना
परम सिद्ध हो जाना
स्वयं बुद्ध हो जाना

प्रज्ञाशील करुण को धर
हृदय में दयाभाव को भर
मानव मूल्यों के प्रति
तुम अनुबद्ध हो जाना
स्वयं बुद्ध हो जाना

बुद्ध को शरण मान लो
धर्म ही शरण जान लो
संघ की जो मिले शरण
परम पवित्र शुद्ध हो जाना
स्वयं बुद्ध हो जाना..!!

 

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