स्वप्न-कविता-करन कोविंद -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karan Kovind

स्वप्न-कविता-करन कोविंद -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karan Kovind

कोई बात तो है जो
स्वप्न आया मुझे
नीद्रा न टूटी ख्याब न छूटे

तमिस्त्र लगे जैसे भयावाह
शिरा सम्पुष्ट थी राज अछूते
अन्तस मे विचार का स्पष्ट प्रवाह

कोई बात तो है जो
स्वप्न आया मुझे

वर्षो से दिखा न मुझे मिला उस पहर
बिना शरीर का एक बुद्धवाह
पूंछा कुछ हाल चाल और दिनचार्य
उड चला फिर बनकर चिर हवा

कोई बात तो है जो
स्वप्न आया मुझे

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