स्मरणीय भाव-बाल कविता-श्रीधर पाठक -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shridhar Pathak

स्मरणीय भाव-बाल कविता-श्रीधर पाठक -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shridhar Pathak

 

वंदनीय वह देश, जहाँ के देशी निज-अभिमानी हों
बांधवता में बँधे परस्पर, परता के अज्ञानी हों
निंदनीय वह देश, जहाँ के देशी निज अज्ञानी हों
सब प्रकार पर-तंत्र, पराई प्रभुता के अभिमानी हों

 

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