स्नेह-कविता-करन कोविंद -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karan Kovind

स्नेह-कविता-करन कोविंद -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karan Kovind

स्नेह कि चादर लेकर
यहा मत बिछाव

एक जड – चेतन की झूठी अव्यक्त
एक चिढन की भार-बोझ व्यक्त
ऐसे खुले पहर न दर्शावो
तुम ध्रुत हो छलन-साल न उपसाव

स्नेह कि चादर लेकर
यहा मत बिछाव

चले हो मन- चुगल दुःस सन्ताप
कहते हो अपने को हिती अपिव्याप
इतना चाहत मत दिखलावो
मै जानता हू। क्रूम – चापलूस अभाव

स्नेह कि चादर लेकर
यहा मत बिछावो

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