स्थिति-कहें केदार खरी खरी-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

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बिगड़े हैं लोग
और बिगड़ा है आचरण
रोके नहीं रुकता अपराधों का प्रजनन

रचनाकाल: २९-०४-१९६८

 

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