सो बैरागी जि उलटे ब्रहमु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सो बैरागी जि उलटे ब्रहमु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सो बैरागी जि उलटे ब्रहमु ॥
गगन मंडल महि रोपै थमु ॥
अहिनिसि अंतरि रहै धिआनि ॥
ते बैरागी सत समानि ॥
बोलै भरथरि सति सरूपु ॥
परम तंत महि रेख न रूपु ॥६॥(953)॥

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