सो गिरही जो निग्रहु करै-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सो गिरही जो निग्रहु करै-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सो गिरही जो निग्रहु करै ॥
जपु तपु संजमु भीखिआ करै ॥
पुंन दान का करे सरीरु ॥
सो गिरही गंगा का नीरु ॥
बोलै ईसरु सति सरूपु ॥
परम तंत महि रेख न रूपु ॥२॥(952)॥

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