सो उदासी जि पाले उदासु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सो उदासी जि पाले उदासु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सो उदासी जि पाले उदासु ॥
अरध उरध करे निरंजन वासु ॥
चंद सूरज की पाए गंढि ॥
तिसु उदासी का पड़ै न कंधु ॥
बोलै गोपी चंदु सति सरूपु ॥
परम तंत महि रेख न रूपु ॥४॥(952)॥

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