सोनिया समन्दर-कविता-नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

सोनिया समन्दर-कविता-नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

सोनिया समन्दर
सामने
लहराता है
जहाँ तक नज़र जाती है,
सोनिया समन्दर !

बिछा है मैदान में
सोन ही सोना
सोना ही सोना
सोना ही सोना

गेहूँ की पकी फसलें तैयार हैं–
बुला रही हैं
खेतिहरों को
…”ले चलो हमें
खलिहान में–
घर की लक्ष्मी के
हवाले करो
ले चलो यहाँ से”

बुला रही हैं
गेहूँ की तैयार फसलें
अपने-अपने कॄषकों को…

(1983)

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