सोच-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

सोच-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

क्यों मेरा दिल शाद नहीं है क्यों ख़ामोश रहा करता हूं
छोड़ो मेरी राम कहानी मैं जैसा भी हूं अच्छा हूं

मेरा दिल ग़मगीं है तो क्या ग़मगीं यह दुनिया है सारी
ये दुख तेरा है ना मेरा हम सबकी जागीर है प्यारी

तू गर मेरी भी हो जाये दुनिया के ग़म यूं ही रहेंगे
पाप के फन्दे, ज़ुल्म के बंधन अपने कहे से कट ना सकेंगे

ग़म हर हालत में मुहलिक है अपना हो या और किसी का
रोना-धोना, जी को जलाना यूं भी हमारा, यूं भी हमारा

क्यों न जहां का ग़म अपना लें बाद में सब तदबीरें सोचें
बाद में सुख के सपने देखें सपनों की ताबीरें सोचें

बे-फ़िक्रे धन-दौलतवाले ये आख़िर क्यों ख़ुश रहते हैं
इनका सुख आपस में बांटें ये भी आख़िर हम जैसे हैं

हमने माना जंग कड़ी है सर फूटेंगे, ख़ून बहेगा
ख़ून में ग़म भी बह जायेंगे हम न रहें, ग़म भी न रहेगा

 

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