सोच-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

सोच-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

तुम उदास होती हो तो
दोपहरी भी शाम लगती है
कभी आँखों में नमी भी आई तो
तो गालों पर सावन बन बरसती हैं

तुम तो अरुण कमल सी खिली
आँधियों में भी रही हो मुस्कुराती
फिर क्यों शून्य निहार रही हो
तुम्हे देख तो वसंत भी है हट जाती

जीवन में तुमको इतना प्यार दिया
जैसे लहरों में लिपटा सागर अथाह
धन हो, वैभव हो नभ सी ऊँची
सरिता हो, प्यार का लिए अविरल प्रवाह

ये तो प्रकृति है, समय की गति है
हम दोनों आज साथ हैं क्या यह कम है
कल न जाने कौन पहले निकल जाये
समय पर चलता, किसका दम है

कभी सपने में देखा था
गुलाब की पंखुडियां नदी में बहती
लगा जैसे मै ही बिखर गया हूँ
पर वे तुम तक आ पहुंची मन में तैरती

यह प्यार शाश्वत है
हम-तुम कहीं कट भी गए पतंग से
कहीं तो मिलेंगे आसमान में
तुमसे फिर रतिमय सिन्दूरी रंग में

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