सोए हुए बच्चों को कहा -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

सोए हुए बच्चों को कहा -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

सोए हुए बच्चों को कहा सर को पकड़ कर ।
चल दोगे अब्बा को मुसीबत में जकड़ कर ।
थी ज़िन्दगी लिखी हुई किस्मत में उजड़ कर ।
फिर मिलने का वादा तो किए जायो बिछड़ कर ।
थे चार, हो अब दो ही, सहर येह भी न होंगे ।
हम सबर करेंगे जु अगर येह भी न होंगे ।

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