सैनिक का अंत समय आया-प्रहरी : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

सैनिक का अंत समय आया-प्रहरी : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

व्यथा मुक्त, दीपित चेहरा
हिय में कुछ भाव लिए गहरा,
दृग में विद्युत – सी चमक अभी
मन में माटी की गमक अभी।
सीमा पर क्षत- विक्षत काया
सैनिक का अंत समय आया।

पीड़ा साँसों में लिये पवन
आँसू टपकाता हुआ गगन,
गिरिराज व्यथा से झुके हुए
पल ऐसे मानो रुके हुए।
जनमानस पर गम की छाया
सैनिक का अंत समय आया।

जीवन का पूर्ण हुआ सपना
वपु राष्ट्र हेतु जाये अपना,
ध्वज में तन को लिपटा जाये
अर्थी चढ़ कलियाँ हर्षायें।
वर्दी में दाग न लग पाया।
सैनिक का अंत समय आया।

मिले दूसरा जन्म अगर
चाहूँ अपनाना यही डगर,
ले लूँ दुश्मन से वो जमीन
ली हमसे है कभी छीन।
इस जन्म न प्रश्न सुलझ पाया
सैनिक का अंत समय आया।

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