सेहरा-कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

सेहरा-कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

सजायो बज़्म दरे-मयकदा कुशादा करो
उठायो साज़े-तरब, एहतमामे-बादा करो
जलायो चांद सितारे, चिराग़ काफ़ी नहीं
येह शब है जशन की शब रौशनी ज़ियादा करो

सजायो बज़्म कि रंजो-अलम के ज़ख़्म सिले
बिसाते-लुत्फ़ो-मुहब्बत पे आज यार मिले
दुआ को हाथ उठायो कि वक़्ते-नेक आया
रुख़े-अज़ीज़ पे सेहरे के आज फूल खिले
उठायो हाथ कि येह वक़्ते-ख़ुश मुदाम रहे
शबे-निशातो-बिसाते-तरब दवाम रहे
तुम्हारा सहन मुनव्वर हो मिसले-सहने-चमन
और इस चमन में बहारों का इंतज़ाम रहे

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