सेखनाग पातंजल मथ्या गुरमुख शासत्र नाग सुणाई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

सेखनाग पातंजल मथ्या गुरमुख शासत्र नाग सुणाई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सेखनाग पातंजल मथ्या गुरमुख शासत्र नाग सुणाई ॥
वेद अथरवन बोल्या जोग बिना नह भरम चुकाई ॥
ज्युंकर मैली आरसी सिकल बिना नहं मुख दिखाई ॥
जोग पदारथ निरमला अनहद धुन अन्दर लिवलाई ॥
अशदसा सिधि नउनिधी गुरमुख जोगी चरन लगाई ॥
त्रेहु जुगां की बाशना कलिजुग विच पातंजल पाई ॥
हथो हथी पाईऐ भगत जोग की पूर कमाई ॥
नाम दान इशनान सुभाई ॥14॥

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