सूर्या-आद्यन्त -धर्मवीर भारती-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dharamvir Bharati

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क्या यह अंधेरा ही एक मात्र सत्य है?
प्रश्न यह मैंने बार-बार दोहराया है!

उत्तर में कोई कुछ नहीं बोला!

उत्तर में, ओ सूर्या!
तुमको हर बार मैंने अपने
कुछ और निकट, और निकट पाया है!

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