सूरदास ने कभी कहा था-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

सूरदास ने कभी कहा था-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

सूरदास ने कभी कहा था
नारी को शृंगार भाव से,
‘अद्भुत एक अनूपम बाग’।

युग बदला,
अब नारी बदली,
नहीं रही वह बाग पुरातन।

अब नारी है नर के साथ।
करनी करते उसके हाथ।

रचनाकाल: २१-०९-१९९१

 

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