सुषमा-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

सुषमा-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

ये मन क्यों बावला सा
तुम्हे ही ढूंढता रहता है
तुम सत्य हो और मन-माया भी
तुम्हे पाने ये विश्वास क्यों डोलता रहता है

तुम प्यार हो जलधि सी गहरी
श्रद्धा हो, लिए आकाश सा विस्तार
सुषमा, जैसे रति का करती आह्वान हो
तुम सुख हो अनुभव सा निराकार

कुछ कह दो, इस मन से
तुम्हारा प्यार, श्वासों की लय है
जब तक प्राण है, तुम हो
हर पल तुमसे ही मधुमय है

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