सुपन चरित्र चित्र बानक बने बचित्र-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सुपन चरित्र चित्र बानक बने बचित्र-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सुपन चरित्र चित्र बानक बने बचित्र
पावन पवित्र मित्र आज मेरै आए है ।
परम दयाल लाल लोचन बिसाल मुख
बचन रसाल मधु मधुर पियाए है ।
सोभित सिजासन बिलासन दै अंकमाल
प्रेमरस बिसम हुइ सहज समाए है ।
चात्रिक सबद सुनि अखिया उघरि गई
भयी जल मीन गति बिरह जगाए है ॥२०५॥

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