सुनो-गोपाल सिंह नेपाली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Singh Nepali

सुनो-गोपाल सिंह नेपाली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Singh Nepali

सुनो !
तुम ने कभी साहिल पे बिखरी रेत देखी है?
समंदर साथ बहता है
मगर उसके मुक़द्दर में
हमेशा प्यास रहता है !!

सुनो !
तुम ने कभी सेहरा में जलते पेड़ देखे हैं?
सभी को छाँव देता है
मगर उस को
सिले में धूप मिलती है !!

सुनो !
तुम ने कभी शाखाओं से लगे फूल देखें हैं?
खुशबु बाँटते हैं हवाओं के संग
मगर हवाएँ उन्हें भी
एक दिन बिखेर देती हैं !!

सुनो !
तुम ने कभी मेले में बजते ढोल देखें हैं?
बहुत ही शोर करते हैं
मगर अंदर से देखो तो
पुरे खाली होते हैं !!

यही अपना फ़साना है !
यही अपनी पहेली है !!

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