सुनो कहता दीप ललकार के-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

सुनो कहता दीप ललकार के-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

 

सुनो
कहता दीप ललकार के
अंधेरों संग मेरी जंग है।
वक़्त बदलने को
साथ दो मेरा
मेरी तो अब यही मांग है।
लेकिन
अगर खुद ही
सोये रहना हो
चाहते रातों
सर इल्ज़ाम न देना
प्रभात का उत्सव
उसने ही मनाना
जिसने है आना मेरे संग।

 

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