सुधा को समुद्र तामें, तुरे है नक्षत्र कैधों-आलम शेख -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Aalam Sheikh

सुधा को समुद्र तामें, तुरे है नक्षत्र कैधों-आलम शेख -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Aalam Sheikh

सुधा को समुद्र तामें, तुरे है नक्षत्र कैधों,
कुंद की कली की पाँति बीन बीन धरी है ।
‘आलम’ कहत ऐन, दामिनी के बीज बये,
बारिज के मध्य मानो मोतिन की लरी है ।
स्वाति ही के बुंद बिम्ब विद्रुम में बास लीन्हों,
ताकी छबि देख मति मोहन की हरी है ।
तेरे हँसे दसन की, ऐसी छवि राजति है,
हीरन की खानि मानों, ससी माँहिं करी है ।

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