सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि -सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि -सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

 

सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥
हुकमु न जाई मेटिआ जो लिखिआ सो नालि ॥
कउणु मूआ कउणु मारसी कउणु आवै कउणु जाइ ॥
कउणु रहसी नानका किस की सुरति समाइ ॥१॥(1091)॥

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