सुख-क्षण-अरी ओ करुणा प्रभामय अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

सुख-क्षण-अरी ओ करुणा प्रभामय अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

यह दु:सह सुख-क्षण
मिला अचानक हमें
अतर्कित।

तभी गया तो छोड़ गया
यह दर्द अकथ्य, अकल्पित।

रंग-बिरंगी मेघ-पताकाओं से
घिर आया नभ सारा:
नीरव टूट गिर गया जलता
एक अकेला तारा।

साउथ एवेन्यू, नयी दिल्ली, 6 दिसम्बर, 1956

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