सीधी बात-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

सीधी बात-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

 

हमें हुक्म न दें
हमसे बात करें।
हुक्म मालिक देता है।
आपको हमने मालिक नहीं
अपना प्रतिनिधि चुना है।
हमसे
अपनों की तरह बात करें
जो कहोगे, सुनेंगे।
हमारे मालिक न बनें।
हमारी रगों में
हुक्म के लिए अवमानना है।
प्यार के लिए है प्यार।
एक हाथ लो, दूसरे हाथ दो।
सौदा बराबरी का।
हुक्म पराया करते हैं।
अगर अपने हो
तो
अपना बनकर दिखाओ
चुनाव समय ही
न कहो, भाईयो-बहनों
अपने उम्मीदवार जिताओ।
हमारे पास
लावलश्कर सहित नहीं,
अपनों जैसे आओ।
कोशिश करना
कि
इंतजार बना रहे।

 

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