सिरे मिलाते हुए- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

सिरे मिलाते हुए- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

 

दूरदर्शनी नाटक था-
दोनों प्रेम का मचलता संगीत
दोनों रूप का स्वप्न
बोल-बोल कहकहे
उड़ान भरते कबूतर
हाथ को हाथ छूता हुआ
झाड़ी पर कलियों की चटक
उतावलापन पास आ गया
समन्दर लहरों-लहरों उछला
होठों ही होठों पर नर्तकी बिजलियों की मुद्राएँ

ऐसे में अचानक कुछ हो गया
कार्यक्रम में रुकावट-
फिर देर तक दिखते रहे
चमकते चित्र खंडहरों के
प्राचीन काल, बरतनों पर उकेरे चित्र
क़दावर पांडवों की बिना हाथ-पाँव मूर्तियाँ-
फिर आ गया ढोल बजाता बड़ा समाचार बुलेटिन :

ईरान का युद्ध
पोलैंड की घुटन
गोलान पहाड़ियों पर जीत का झंडा
यू.एन.ओ. का शोर
मासूम बच्चे का माँ के दामन तले से
ग़ायब हो जाना!

 

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