सिरलत्थां दी सत्थ अग्गे-गज़लें-कर्मजीत सिंह गठवाला -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karamjit Singh Gathwala

सिरलत्थां दी सत्थ अग्गे-गज़लें-कर्मजीत सिंह गठवाला -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karamjit Singh Gathwala

सिरलत्थां दी सत्थ अग्गे, लंघणां तां लंघीं सोच के ।
सारे राह कंडे ही कंडे, पैर रक्खीं बोच के ।

दिल ‘चों निकली जीभ अटकी, गल्ल तेरे अन्दरे,
किन्नां चिर तूं होर रक्खनी मल्लोजोरी रोक के ।

‘किन्ने पिंडे छाले होए’, वार वार क्युं पुच्छदा ?
ज़ख़मां उत्ते लून छिड़कें आपे भट्ठी झोक के ।

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