सिंहासन-नीरज कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Neeraj Kumar

सिंहासन-नीरज कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Neeraj Kumar

 

भीड़ चीख़ रही है
चिल्ला रही है
शोर मचा रही है

सिंहासन बेसुध है
मदहोश है
मगन है
मस्त है
आश्वस्त है

शायद सिंहासन भूल गया है
इसी चीख़ ने उसे सिंहासन दिया है

 

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