साहिर लुधियानवी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Sahir Ludhianvi Part 6

साहिर लुधियानवी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Sahir Ludhianvi Part 6

हम इन्तज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक

हम इन्तज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक
ख़ुदा करे कि क़यामत हो और तू आए

यह इन्तज़ार भी एक इम्तिहान होता है
इसी से इश्क का शोला जवान होता है
यह इन्तज़ार सलामत हो और तू आए

बिछाए शौक़ के सजदे वफ़ा की राहों में
खड़े हैं दीद की हसरत लिए निगाहों में
कुबूल दिल की इबादत हो और तू आए

वो ख़ुशनसीब हो जिसको तू इन्तिख़ाब करे
ख़ुदा हमारी मोहब्बत को कामयाब करे
जवाँ सितार-ए-क़िस्मत हो और तू आए
ख़ुदा करे कि क़यामत हो और तू आए

वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ

किशोर:
वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ
जहाँ तुम हो वहाँ मैं भी हूँ
वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ
जहाँ तुम हो वहाँ मैं भी हूँ

आशा:
छुओ नहीं देखो ज़रा पीछे रखो हाथ
जवाँ तुम हो जवाँ मैं भी हूँ
छुओ नहीं देखो ज़रा पीछे रखो हाथ
जवाँ तुम हो जवाँ मैं भी हूँ

किशोर:
सुनो मेरी जाँ हँस के मुझे ये कह दो
भीगे-भीगे लबों की नरमी मेरे लिए है
जवाँ नज़र की मस्ती मेरे लिए है
हसीं अदा की शोख़ी मेरे लिए है
मेरे लिए ले के आई हो ये सौग़ात
जहाँ तुम हो वहाँ मैं भी हूँ

आशा:
छुओ नहीं देखो …

मेरे ही पीछे आख़िर पड़े हो तुम क्यों
इक मैं जवाँ नहीं हूँ और भी तो हैं
हो मुझे ही घेरे आख़िर खड़े हो तुम क्यों
मैं ही यहाँ नहीं हूँ और भी तो हैं
जाओ जा के ले लो जो भी दे-दे तुम्हें हाथ
जहाँ सब हैं वहाँ मैं भी हूँ
जहाँ सब हैं वहाँ मैं भी हूँ

किशोर:
वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ
जहाँ तुम हो वहाँ मैं भी हूँ

रात भी है कुछ भीगी-भीगी

रात भी है कुछ भीगी- भीगी, चांद भी है कुछ मद्धम-मद्धम

तुम आओ तो आँखें खोले, सोई हुई पायल की छम-छम
किसको बताएँ, कैसे बताएँ, आज अजब है दिल का आलम

चैन भी है कुछ हलका-हलका, दर्द भी है कुछ मद्धम-मद्धम

तपते दिल पर यूँ गिरती है, तेरी नज़र से प्यार की शबनम
जलते हुए जंगल पर जैसे, बरखा बरसे रुक-रुक थम-थम

रात भी है कुछ भीगी-भीगी, चांद भी है कुछ मद्धम-मद्धम

होश में थोड़ी बेहोशी है, बेहोशी में होश है कम-कम
तुझ को पाने की कोशिश में दोनों जहाँ से खो गए हम

चैन भी है कुछ हलका-हलका, दर्द भी है कुछ मद्धम-मद्धम

ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं

लता:
ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें
ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें
तसव्वुर में कोई बसता नहीं, हम क्या करें
तुम्ही कह दो, अब ऐ जानेवफ़ा, हम क्या करें

रफ़ी:
लुटे दिल में दिया जलता नहीं, हम क्या करें
तुम्ही कह दो, अब ऐ जाने-अदा, हम क्या करें

लता:
ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें
किसी के दिल में बस के दिल को, तड़पाना नहीं अच्छा
किसी के दिल में बस के दिल को, तड़पाना नहीं अच्छा
निगाहों को छलकते देख के छुप जाना नहीं अच्छा,
उम्मीदों के खिले गुलशन को, झुलसाना नहीं अच्छा
हमें तुम बिन, कोई जंचता नहीं, हम क्या करें,
तुम्ही कह दो, अब ऐ जानेवफ़ा, हम क्या करें

रफ़ी:
लुटे दिल में दिया जलता नहीं, हम क्या करें
मुहब्बत कर तो लें लेकिन, मुहब्बत रास आये भी
मुहब्बत कर तो लें लेकिन, मुहब्बत रास आये भी
दिलों को बोझ लगते हैं, कभी ज़ुल्फ़ों के साये भी
हज़ारों ग़म हैं इस दुनिया में, अपने भी पराये भी
मुहब्बत ही का ग़म तन्हा नहीं, हम क्या करें
तुम्ही कह दो, अब ऐ जाने-अदा, हम क्या करें

लता: ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें

बुझा दो आग दिल की, या इसे खुल कर हवा दे दो
बुझा दो आग दिल की, या इसे खुल कर हवा दे दो

रफ़ी:
जो इसका मोल दे पाये, उसे अपनी वफ़ा दे दो

लता:
तुम्हारे दिल में क्या है बस, हमें इतना पता दे दो,
के अब तन्हा सफ़र कटता नहीं, हम क्या करें

रफ़ी:
लुटे दिल में दिया जलता नहीं, हम क्या करें

लता:
ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करे

तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ

तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ
और दुआ देके परेशान सी हो जाती हूँ

मेरे मुन्ने मेरे गुलज़ार के नन्हे पौधे
तुझको हालत की आँधी से बचाने के लिये
आज मैं प्यार के आँचल में छुपा लेती हूँ
कल ये कमज़ोर सहारा भी न हासिल होगा
कल तुझे काँटों भरी राहों पे चलना होगा
ज़िंदगानी की कड़ी धूप में जलना होगा
तेरे बचपन को जवानी …

तेरे माथे पे शराफ़त की कोई मोहर नहीं
चंद होते हैं मुहब्बत के सुकून ही क्या हैं
जैसे माओं की मुहब्बत का कोई मोल नहीं
मेरे मासूम फ़रिश्ते तू अभी क्या जाने
तुझको किस-किसकी गुनाहों की सज़ा मिलनी है
दीन और धर्म के मारे हुए इंसानों की
जो नज़र मिलनी है तुझको वो खफ़ा मिलनी है
तेरे बचपन को जवानी …

बेड़ियाँ लेके लपकता हुआ कानून का हाथ
तेरे माँ-बाप से जब तुझको मिली ये सौगात
कौन लाएगा तेरे वास्ते खुशियों की बारात
मेरे बच्चे तेरे अंजाम से जी डरता है
तेरी दुश्मन ही न साबित हो जवानी तेरी
काँप जाती है जिसे सोचके ममता मेरी
उसी अंजाम को पहुंचे न कहानी तेरी
तेरे बचपन को जवानी …

दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना

दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना
जहाँ नहीं चैना वहाँ नहीं रहना
दुखी मन…

दर्द हमारा कोई न जाने
अपनी गरज के सब हैं दीवाने
किसके आगे रोना रोएं
देस पराया लोग बेगाने
दुखी मन…

लाख यहाँ झोली फैला ले
कुछ नहीं देंगे इस जग वाले
पत्थर के दिल मोम न होंगे
चाहे जितना नीर बहाले
दुखी मन…

अपने लिये कब हैं ये मेले
हम हैं हर इक मेले में अकेले
क्या पाएगा उसमें रहकर
जो दुनिया जीवन से खेले
दुखी मन…

नीले गगन के तले

हे….,
नीले गगन के तले, धरती का प्यार पले

ऐसे ही जग में, आती हैं सुबहें
ऐसे ही शाम ढले
हे….,
नीले गगन……

शबनम के मोती, फूलों पे बिखरे
दोनों की आस फले
हे….,
नीले गगन……

बलखाती बेलें, मस्ती में खेलें
पेड़ों से मिलके गले
हे….,
नीले गगन……

नदिया का पानी, दरिया से मिलके
सागर किस ओर चले
हे….,
नीले गगन……

मिलती है जिंदगी में मोहब्बत कभी कभी

मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी-कभी
होती है दिल्बरों की इनायत कभी-कभी

शर्मा के मुँह न फेर नज़र के सवाल पर
लाती है ऐसे मोड़ पर क़िस्मत कभी-कभी

खुलते नहीं हैं रोज़ दरिचे बहार के
आती है जान-ए-मन ये क़यामत कभी-कभी

तनहा न कट सकेंगे जवानी के रास्ते
पेश आएगी किसीकी ज़रूरत कभी-कभी

फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में
मिलती है पास आने की मुहलत कभी-कभी

होती है दिलबरों की इनायत कभी-कभी
मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी

मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझ से

ताज तेरे लिये इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही
तुम को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही

मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझ से

बज़्म-ए-शाही में ग़रीबों का गुज़र क्या मानी
सब्त जिस राह पे हों सतवत-ए-शाही के निशाँ
उस पे उल्फ़त भरी रूहों का सफ़र क्या मानी

मेरी महबूब पस-ए-पदर्आ-ए-तश्हीर-ए-वफ़ा
तू ने सतवत के निशानों को तो देखा होता
मुदर्आ शाहों के मक़ाबिर से बहलने वाली
अपने तारीक मकानों को तो देखा होता

मैंने तुझे माँगा तुझे पाया है

मैंने तुझे माँगा तुझे पाया है
तूने मुझे माँगा मुझे पाया है
आगे हमें जो भी मिले या ना मिले गिला नहीं

छाँव घनी ही नहीं धूप कड़ी भी होती है राहों में
ग़म हो कि ख़ुशियाँ हों हमको सभी लेना है बाँहों में
यों दुखी हो के जीने वाले क्या ये तुझे पता नहीं
मैने तुझे माँगा …

ज़िद है तुम्हें तो लो लब पे न शिकवा कभी भी लाएँगे
हँस के सहेंगे जो दर्द या ग़म ये जहाँ से पाएँगे
तुझको जो बुरा लगे ऐसा भी किया नहीं
मैने तुझे माँगा …

मैं पल दो पल का शायर हूँ

मैं पल-दो-पल का शायर हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है ।
पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है ॥

मुझ से पहले कितने शायर आए और आ कर चले गए,
कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़में गा कर चले गए ।
वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ,
कल तुम से जुदा हो जाऊंगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ ॥

मैं पल-दो-पल का शायर हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है ।
पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है ॥

कल और आएंगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले,
मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले ।
कल कोई मुझ को याद करे, क्यों कोई मुझ को याद करे
मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यों वक़्त अपना बरबाद करे ॥

मैं पल-दो-पल का शायर हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है ।
पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है ॥

मैं हर इक पल का शायर हूँ

मैं हर इक पल का शायर हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें खत्म नहीं होतीं
ख़्वाबों और उमँगों की मियादें खत्म नहीं होतीं
इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है
इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है

मैं हर इक पल का शायर हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

तुझको मुझको जीवन अम्रित अब इन हाथों से पीना है
इनकी धड़कन में बसना है, इनकी साँसों में जीना है
तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएं देता हूँ
जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएं देता हूँ

मैं हर इक पल का शायर हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

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