सावणु राति अहाड़ु दिहु कामु क्रोधु दुइ खेत-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सावणु राति अहाड़ु दिहु कामु क्रोधु दुइ खेत-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सावणु राति अहाड़ु दिहु कामु क्रोधु दुइ खेत ॥
लबु वत्र दरोगु बीउ हाली राहकु हेत ॥
हलु बीचारु विकार मण हुकमी खटे खाइ ॥
नानक लेखै मंगिऐ अउतु जणेदा जाइ ॥१॥(955)॥

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