सार्थकता-कविताएँ-गिरिजा कुमार माथुर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Girija Kumar Mathur

सार्थकता-कविताएँ-गिरिजा कुमार माथुर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Girija Kumar Mathur

तुमने मेरी रचना के
सिर्फ एक शब्द पर
किंचित मुस्का दिया
– अर्थ बन गई भाषा

छोटी सी घटना थी
सहसा मिल जाने की
तुमने जब चलते हुए
एक गरम लाल फूल
होठों पर छोड दिया
-घटना सच हो गई

संकट की घडियों में
बढते अंधकार पर
तुमने निज पल्ला डाल
गांठ बना बांध लिया
– व्यथा अमोल हो गई

मुझसे जब मनमाना
तुमने देह रस पाकर
आंखों से बता दिया
-उम्र अमर हो गई

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