सारी हैरत है मिरी सारी अदा उसकी है-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar 

सारी हैरत है मिरी सारी अदा उसकी है-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

सारी हैरत है मिरी सारी अदा उसकी है
बेगुनाही है मिरी और सजा उसकी है

मेरे अल्फ़ाज़ में जो रंग है वो उसका है
मेरे एहसास में जो है वो फ़िज़ा उसकी है

शे’र मेरे हैं मगर उनमें मुहब्बत उसकी
फूल मेरे हैं मगर बादे-सबा उसकी है

इक मुहब्बत की ये तस्वीर है दो रंगों में
शौक़ सब मेरा है और सारी हया उसकी है

हमने क्या उससे मुहब्बत की इजाज़त ली थी
दिल-शिकन ही सही, पर बात बजा उसकी है

एक मेरे ही सिवा सबको पुकारे है कोई
मैंने पहले ही कहा था ये सदा उसकी है

ख़ून से सींची है मैंने जो ज़मीं मर-मर के
वो ज़मीं, एक सितमगर ने कहा, उसकी है
उसने ही इसको उजाड़ा है इसे लूटा है
ये ज़मीं उसकी अगर है भी तो क्या उसकी है

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