सारा दिनु लालचि अटिआ-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

सारा दिनु लालचि अटिआ-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

सारा दिनु लालचि अटिआ मनमुखि होरे गला ॥
राती ऊघै दबिआ नवे सोत सभि ढिला ॥
मनमुखा दै सिरि जोरा अमरु है नित देवहि भला ॥
जोरा दा आखिआ पुरख कमावदे से अपवित अमेध खला ॥
कामि विआपे कुसुध नर से जोरा पुछि चला ॥
सतिगुर कै आखिऐ जो चलै सो सति पुरखु भल भला ॥
जोरा पुरख सभि आपि उपाइअनु हरि खेल सभि खिला ॥
सभ तेरी बणत बणावणी नानक भल भला ॥2॥304॥

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