सामां किराए का-अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

सामां किराए का-अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जब खु़द के साथ नहीं होते,
कितने अजूबे होते हो,
भ्रम में भूले हुए,
कोई शगूफे़ होते हो।
जैसे नटबाज़ी करता
हुआ कोई नट
परायी ताल पर
थिरकते जमूरे होते हो।

किस अजनबीयत से
छूती हैं मेरी नज़रें तुम्हें
जब गुज़रती हैं
नज़दीक से
देखकर तुम्हारे
तमाशे अजीब से
जब खु़द ही खु़द को
भूले हुए होते हो।

यह सामां किराए का
है या उधार का
लग रहा जो प्यारा
उठा लाए हो समेट
लौटा दो वापस
कहां ले जाओगे
यह बोझ सारा
पाकर इन्हें भी
अन्जाने ख़ालीपन में
डूबे हुए होते हो ।

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