सापु कुंच छोडै बिखु नही छाडै-आसा बाणी स्री नामदेउ जी ੴ सतिगुर प्रसादि-शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji

सापु कुंच छोडै बिखु नही छाडै-आसा बाणी स्री नामदेउ जी ੴ सतिगुर प्रसादि-शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji

सापु कुंच छोडै बिखु नही छाडै ॥
उदक माहि जैसे बगु धिआनु माडै ॥1॥

काहे कउ कीजै धिआनु जपंना ॥
जब ते सुधु नाही मनु अपना ॥1॥रहाउ॥

सिंघच भोजनु जो नरु जानै ॥
ऐसे ही ठगदेउ बखानै ॥2॥

नामे के सुआमी लाहि ले झगरा ॥
राम रसाइन पीओ रे दगरा ॥3॥4॥485॥

 

 

Leave a Reply