साधो कउन जुगति अब कीजै- शब्द-ੴ सतिगुर प्रसादि रागु रामकली महला ९ -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

साधो कउन जुगति अब कीजै- शब्द-ੴ सतिगुर प्रसादि
रागु रामकली महला ९ -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

साधो कउन जुगति अब कीजै ॥
जा ते दुरमति सगल बिनासै राम भगति मनु भीजै ॥1॥रहाउ॥
मनु माइआ महि उरझि रहिओ है बूझै नह कछु गिआना ॥
कउनु नामु जगु जा कै सिमरै पावै पदु निरबाना ॥1॥
भए दइआल किपाल संत जन तब इह बात बताई ॥
सरब धरम मानो तिह कीए जिह प्रभ कीरति गाई ॥2॥
राम नामु नरु निसि बासुर महि निमख एक उरि धारै ॥
जम को त्रासु मिटै नानक तिह अपुनो जनमु सवारै ॥3॥2॥902॥

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