साधो इहु मनु गहिओ न जाई- शब्द-रागु गउड़ी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

साधो इहु मनु गहिओ न जाई- शब्द-रागु गउड़ी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

साधो इहु मनु गहिओ न जाई ॥
चंचल त्रिसना संगि बसतु है, या ते थिरु न रहाई ॥1॥
कठन करोध घट ही के भीतरि जिह सुधि सभ बिसराई ॥
रतनु गिआनु सभ को हिरि लीना ता सिउ कछु न बसाई ॥1॥
जोगी जतन करत सभि हारे गुनीरहे गुन गाई ॥
जन नानक हरि भए दइआला तउ सभ बिधि बनि आई ॥2॥4॥219॥

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