साथ रहो तो सबसे बेहतर-कविताएँ -कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas

साथ रहो तो सबसे बेहतर-कविताएँ -कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas

साथ रहो तो सबसे बेहतर
मौन रहो आभारी है
सत्ता की कविता से केवल
इतनी रिश्तेदारी है
सारी दुविधा प्रतिशत पर है
कितना सच बोला जाए
गूँगे सिखा रहे हैं हमको
मुँह कितना खोला जाए

हक़ के लिए लड़ो मर जाओ
जग को बतलाने वाले
आत्ममुग्ध बौने स्वराज का
परचम फहराने वाले
हम को बच्चा समझ रहे हैं
ख़ुद को बहलाने वाले
शाल ओढ़ कर घी पीते हैं
त्यागी कहलाने वाले
इतने हलके हैं कहते हैं
हमें नहीं तोला जाए
गूँगे सिखा रहे हैं हमको
मुँह कितना खोला जाए

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