साक्षी है-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

साक्षी है-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

साक्षी है
फटी कमीज
कि
वह भी
फटा है
फटेहाल है
जो उसे
पहने है
गले से लटकाए
सीने से चिपकाए!

रचनाकाल: ०२-०८-१९९१

 

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