साईं घोड़े आछतहि गदहन आयो राज- (लोक-नीति)-कुण्डलियाँ -गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

साईं घोड़े आछतहि गदहन आयो राज- (लोक-नीति)-कुण्डलियाँ -गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

साईं घोड़े आछतहि गदहन आयो राज|
कौआ लीजै हाथ में दूरि कीजिये बाज||

दुरी कीजिये बाज राज पुनि ऐसो आयो |
सिंह कीजिये कैद स्यार गजराज चढायो||

कह गिरिधर कविराय जहाँ यह बूझि बधाई|
तहां न कीजै भोर साँझ उठि चलिए साईं ||

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