साईं अपने भ्रात को, कबहुं न दीजै त्रास- (लोक-नीति)-कुण्डलियाँ -गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

साईं अपने भ्रात को, कबहुं न दीजै त्रास- (लोक-नीति)-कुण्डलियाँ -गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

साईं अपने भ्रात को, कबहुं न दीजै त्रास
पलक दूर नहिं कीजिये, सदा राखिये पास

सदा राखिये पास, त्रास कबहूं नहिं दीजै
त्रास दियो लंकेश, ताहि की गति सुन लीजै

कह गिरिधर कविराय, राम सों मिलियो जाई
पाय विभीशण राज, लंकपति बाजयो साईं

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