साँस खींचो-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

साँस खींचो-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

करो गर्जन, करो तर्जन, साँस खींचो
सींग झाड़ो, खुरों से कीचड़ उलीचो
दिखावट के ओ झरोखो, ओ दरीचो
हवा तक तुमसे सहमती, आँख मीचो
और क्या क्‍या बनोगे अब, अरे नीचो
तुम्हें क्या है, कुवेरों के बाग सींचो
सींग झाड़ो, खुरों से कीचड़ उलीचो
करो गर्जन, करो तर्जन, साँस खींचो

30.3.79

Leave a Reply