सर चश्म सब्र दिल दीं तन माल जान आठों-इंशा अल्ला खाँ ‘इंशा’ -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Insha Allah Khan Insha

सर चश्म सब्र दिल दीं तन माल जान आठों-इंशा अल्ला खाँ ‘इंशा’ -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Insha Allah Khan Insha

सर चश्म सब्र दिल दीं तन माल जान आठों
सदक़ा कई हैं तुम पर लो मेहरबान आठों

सज-धज निगह अकड़ छब हुस्न-ओ-अदा-ओ-शोख़ी
नाम-ए-ख़ुदा हैं तुझ में ऐ नौजवान आठों

फ़र्दंग-ओ-चंग-ओ-नय दफ़ बीन-ओ-रुबाब-ओ-सुरनी
हम-साज़-ओ-हम-नवा हैं लेते हैं तान आठों

सातों सुरों में मुतरिब गत भी ये गुथ रहे हैं
हैं सम पे आ ठहरते यकजा नदान आठों

रुख़ ख़ाल-ओ-ज़ुल्फ़-ओ-ख़त लब दंदाँ ज़क़न ज़नख़दाँ
उस के हैं अपने दुश्मन ‘इंशा’ हर आन आठों

 

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