सर्जना-किस करवट जीवन -राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

सर्जना-किस करवट जीवन -राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

तुम सुबह की हवा जैसी चंचल
सर्दियों में शाम की जलती आग हो
अधरों पर प्यार की लालिमा लिये
क्या तुम मधुमय रजनी का राग हो ?

तुम श्रृंगार का पर्याय हो
प्यार की अनुभूति हो
इस जीवन की सुषुम्ना हो
तुम ही सर्जना की प्रतिभूति हो

कुछ और पास आ जाओ
समय से अब डर लगता है
वह निष्ठुर तुम्हे कहीं दूर न ले जाये
यही सोच मन हर बार सहम जाता है

आओ लग जाओ ह्रदय से
बंध जाओ अटूट आलिंगन में
चलो निकल जाएँ समय से आगे
न जाने कब बिजली कौंध जाये इस गगन में

Leave a Reply