सरिता सरोवर सलिल मिल एक भए-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सरिता सरोवर सलिल मिल एक भए-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सरिता सरोवर सलिल मिल एक भए
एक मै अनेक होत कैसे निरवारो जी ।
पान चूना काथा सुपारी खाए सुरंग भए
बहुरि न चतुर बरन बिसथारो जी ।
पारस परति होत कनिक अनिक धात
कनिक मै अनिक न होत गोताचारो जी ।
चन्दन सुबासु कै सुबासना बनासपती
भगत जगत पति बिसम बीचारो जी ॥९३॥

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