सरस्वती वंदना-कविता -स्वागता बसु -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Swagata Basu  

कविता -स्वागता बसु -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Swagata Basu

सरस्वती वंदना

भाल हो ऊँचा सदा और श्रीचरणों में स्थान दो
वाग वागेश्वरी देवी, बस इतना सा वरदान दो।।

मातृभूमि सबल रहे, देशभक्ति प्रबल रहे
शब्दों में श्रृंखला रहे, प्यार भी पला रहे
कर्म का आदर रहे और लेखनी को मान दो
हे श्वेत वस्त्राभृता देवी, बस इतना सा वरदान दो।।

देशद्रोहियों पर वार हो, जातियों में प्यार हो
दुःशासनो का संहार हो, सुरों का विस्तार हो
आशीष की वर्षा रहे और काव्य को सम्मान दो
है वीणावादिनी माँ, बस इतना सा वरदान दो।।

लेखनी में धार हो, वाणी में संस्कार हो
गीत हो मुखरित सदा, छंदों की बौछार हो
मानव की गरिमा रहे और संस्कृति का ज्ञान दो
हे माँ विद्यादायिनी, बस इतना सा वरदान दो।।

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